1. धर्म और परमात्मा का इतिहास उतना पुराना नहीं है जितना हमें लगता है।


500 साल पहले गुरुनानक आए
उससे पहले सिख धर्म नहीं था। 
 
1400 साल पहले मोहम्मद साहब आए
उससे पहले इस्लाम नहीं था।
 
2000 साल पहले ईसा मसीह आए
उससे पहले ईसाई धर्म नहीं था।  
 
2500 साल पहले महात्मा बुद्ध आए
उससे पहले बुद्ध धर्म नहीं था। 
 
2600 साल पहले महावीर आए
उससे पहले जैन धर्म नहीं था। 
 
4000 साल पहले अब्राहम आए

उन्होंने यहूदी धर्म की नींव रखी। उससे पहले यहूदी धर्म भी नहीं था।


 
2. अर्थात आज से 4000 साल पहलेना कोई यहूदी थाना कोई बौद्ध थाना कोई जैन थाना कोई ईसाई थाना कोई मुसलमान थाना ही कोई सिख था। 
 
उससे पहले श्रीकृष्ण भी लगभग 5000 साल पहले आए यानि श्रीमद्भगवद्गीता गीता भी पाँच हजार साल से अधिक पुरानी नहीं है।

इसी प्रकार श्रीराम लगभग 10000 साल पहले आए तो वाल्मीकि रचित रामायण भी दस हजार साल से अधिक पुरानी नहीं है। और जो तुलसी जी ने रामायण का अनुवाद अवधी भाषा में किया, जिसे 'रामचरितमानस' कहा जाता है, वह भी केवल 400 साल पुराना ही है।  

और चार में से तीन वेद (अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद) भी लगभग 2600 साल पहले ही लिखे गए हैं। सिर्फ एक ऋग्वेद ही है जिसको करीब 11000 साल पुराना माना जाता है।  

 
 
निष्कर्ष:
 
यानिधर्म का इतिहास ज्यादा से ज्यादा 13000 साल से पुराना नहीं है। और 13000 साल से पहले ना कोई परमात्मा की अवधारणा थीना ही किसी धर्म का अस्तित्व था।

 

 

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